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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

आत्मारामतया जीवो यात्यसंसङ्गतामिह । आत्मज्ञानेन संसङ्गस्तनुतामेति नान्यथा ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इव“ शब्द से यह दिखलाया कि मन की इस प्रकार की स्थिति भी मिथ्या ही है। उस प्रकार चिति में विश्रान्ति पाकर अवस्थित हुआ जीव समस्त संगो से रहित होकर ब्रह्मभाव को प्राप्त हो जाता है । ब्रह्मभाव को प्राप्त हुआ यह जीव इन समस्त व्यवहारो को चाहे करे, चाहे न करे, उससे कुछ भी उसका बिगडने नहीं पाता