Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
संसारदृष्टिरुदितं ज्ञातलोकपरावरम् ।
न रञ्जयति सच्चित्तं जललेखा यथाम्बुजम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
न रूप, रस, गन्ध, स्पर्श
और शब्द में; न विषयाभिलाषा की परवशतारूपी मोह में, न विषयोपभोग-फलरूपी आनन्दवृत्तियो में;
न खेचरी आदि सिद्धियों में, न अतीत-अनागत वस्तुओं का परिज्ञान होना, दीर्घजीवी होना आदि
सिद्धियों मे मन को आसक्त करना चाहिए