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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

न जाग्रति न च स्वप्ने न सुषुप्ते न निर्मले । नासिते न च वा पीतरक्तादौ शबले न च ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं अहंकार से परिच्छिन्न (स्वल्पता को प्राप्त) नहीं हूँ, मेरे सिवा दूसरा कोई नहीं है, इसलिए मिथ्याभूत शरीर में विषयों से जनित सुख हों चाहे न हों, मैं तो देहादिक के साथ कभी संग को प्राप्त न होनेवाले स्वभाव से युक्त हूँ, इस प्रकार जिसका भीतर से दृढ़ निश्चय है, वह मनुष्य मुक्ति का अधिकारी कहलाता है