Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 40
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
केवल आत्मा ओर अनात्मा के विवेक से उत्पन्न ज्ञान से ही संसक्ति का उच्छेद हो सकता है,
इसका दिग्दर्शन कराने के लिए आसक्ति का विषय जगत् केवल वासना से ही कल्पित है, यह कहते हैं ।
हे राघव, वासना के वश से किसी ने सर्वोत्कृष्ट चिदाकाश में इस विचित्र जगत्रूपी चित्र की रचना
की हे, उसे आप देखिए ॥ ३ ९॥ श्रीरामजी, शून्य आकाश में केवल मन के असंगरूपी रंग से बनाया गया
जो जगद्रूप विचित्र चित्र हे, वह कभी भी सत्य नहीं हो सकता