Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अथवा तमपि त्यक्त्वा चेत्यांशं शान्तचिद्धनः ।
जीवस्तिष्ठतु संशान्तो ज्वलन्मणिरिवात्मनि ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका नाक नाथ से खींचा गया हो, ऐसा
गदहा भयभीतात्मा होकर जो अपनी गति से मार्ग में भार ढोता है, वह आसक्ति के फल का ही एक
विस्तार है। किसी देश में गदहे को भी नाथ लगाते हैं । अथवा “गर्दभ” शब्द को बैल आदि भारवाहक
ग्राम्य पशुओं में उपलक्षण मान लेना चाहिए