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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 68, Verse 44

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 68, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 68 · श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

संसक्तमनसामेता रम्यान्तःपुरपङ्क्तयः । रचिता रौरवा वीचिकालसूत्रादिनामिकाः ॥ ४४ ॥

हिन्दी अर्थ

उपसंहार करते हैं। हे श्रीरामजी, इससे सबके भीतर रहनेवाले आत्मा से भिन्न बाहर से लगे हुए पाँच कोशों का तथा भोग्यवर्गरूप बन्धनो में डालनेवाले समस्त पदार्थों का निरास करने में यही एक मुख्य उपाय निश्चित हुआ कि अखिल दुःखों को देनेवाली क्रूर आसक्ति का परित्याग करना चाहिए यानी इतने विचार से यही निश्चित हुआ आसक्ति परित्याग ही बन्धन के निरास में हेतु है, यह तात्पर्य है