Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 68, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 68, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 68 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
मनः पतति भोगेषु गृध्रो मांसलवेष्विव ।
वन्द्यसंसक्तिवशतो व्यर्थया रम्यशङ्कया ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जो
जीव अहन्ताध्यास युक्त है, वह इस संसाररूपी सागर में डूबा हुआ है और जो अहन्ताध्यास से निर्मुक्त
है, वह संसाररूपी सागर से पार हो चुका है