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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

न शुद्धजडयोरेताः संविदश्चिच्छरीरयोः । एता ह्यज्ञानमात्रस्य तस्मिन्नष्टे चिदेव नः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

भासमान सुख, दुःख आदि के अनुभव किसको होते हैं ? इस शंका पर किसी को नहीं होते, ऐसा समाधान कहते है । शुद्ध चैतन्य ओर जड देह को ये सुख, दुःख आदि के अनुभव नहीं होते, उक्त केवल अज्ञान को ही होते हैं, जब अज्ञान नष्ट हो जाता हैं, तब हम लोगों की के वल शुद्ध चिति ही अवशिष्ट रह जाती है