Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
कालानिलबलोद्धूताज्जर्जराज्जीवितद्रुमात् ।
भोगपुष्पाणि दिवसपर्णानि निपतन्त्यधः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
कालरूपी पवन के द्वारा बलपूर्वक कँपाए गये जर्जर जीवनरूपी वृक्ष से भोगरूपी
फूल और दिवसरूपी पत्ते नीचे गिरते जाते हैं यानी विनष्ट हो जाते हैं