Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
महानुभावसंपर्कात्संसारार्णवलङ्घने ।
युक्तिः संप्राप्यते राम स्फुटा नौरिव नाविकात् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
उद्धार के उपायों का ज्ञान तो सद्युरुओं के समीप जाने से मिलता है, इस आशय से कहते हैं।
हे श्रीरामजी, बड़े बड़े सत्-पुरुषों के समागम से संसाररूपी समुद्र का उल्लघंन करने की युक्ति
उस प्रकार प्राप्त होती है, जिस प्रकार समुद्र का उल्लघंन करने के लिए नाविक से नौका प्राप्त होती
है