Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
सर्वत्र लक्ष्यसे स्वस्थः सर्वत्र परितुष्यसि ।
सर्वत्र वीतरागोऽसि राजन्सर्वत्र राजसे ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राजन्, आप सभी इष्ट ओर अनिष्ट विषयों मे एक-से दिखाई देते हैं, सभी विषयों में
आप सन्तुष्ट रहते हैं, सभी विषयों मे आसक्ति से वर्जित हे, अतएव सर्वत्र सुशोभित हो रहे हैं