Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
आनन्दमधुसंपूर्णो लक्ष्म्या च परया श्रितः ।
शीतलः स्निग्धमधुरो राजीवमिव राजसे ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाराज, स्नेह के कारण अत्यन्त मधुर, सुशीतल,
आनन्दरूपी पुष्परस से परिपूर्ण, उत्तम श्री से सम्पन्न आप कमल के समान अत्यन्त भले लगते हैं