Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
विकिरति परितो रसायनानामिव निकरं मधुरं महानुभाव ।
तव वचनमवेक्षणं च पुण्यं परमपदप्रतिमो हि साधुसङ्गः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महानुभाव, आपके पुण्य वचन
ओर दर्शन चारों ओर से मानों अमृतां की मधुर राशि बरसा रहे हैं, क्योंकि सज्जन पुरुषों का समागम
मोक्षसुख की प्राप्ति सदुश होता हे