Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verses 45–46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verses 45–46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 45,46
संस्कृत श्लोक
वयं त्वद्य महासत्त्व भृशं कुशलिनः स्थिताः ।
त्वदागमनपुण्येन परां पावनतां गताः ॥ ४५ ॥
पश्य त्वदागमक्षीणपापानां पुण्यपादपैः ।
तथा फलितमस्माकं न यथा वयमाकुलाः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
महात्मन्, आज तो हम लोग अत्यन्त सुखी होकर अवस्थित हैं, आपके आगमनरूपी पुण्यो से हम
अत्यन्त पवित्र हो गये हैँ । महानुभाव देखिये आपके आगमन से क्षीण पाप हुए हम लोगों के पुण्यरूपी
वृक्षों ने वह चित्त- समाधानरूपी फल दिया जिससे कि हम लोग सम्पूर्ण व्याकुलताओं से विमुक्त
होकर कृतकृत्य हो गये