Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
सुरघुरुवाच ।
भगवन्नियतेरस्या गतिं सर्पगतेरिव ।
दैविक्याः को हि जानाति गम्भीरां विस्मयप्रदाम् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
परिध द्वारा कहे गये अर्थ का अनुमोदन करते हुए युरघु उसी अर्थ को कहते हैं।
सुरघु ने कहा : भगवन्, भगवान् की इच्छारूपी इस नियति की सर्पगति के समान गम्भीर ओर
विस्मयकारक गति को कौन जान सकता है ? अर्थात् कोई नहीं जान सकता