Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
कच्चिदुद्दामफलिनी फलिनीव फलानता ।
धरा तव फलापूरैर्भृशं धारयति प्रजाः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, उत्कृष्ट
सस्यआदि फलों से सम्पन्न, विविधफलों से विनम्र कल्पलता की नाई पृथिवी क्या आपकी प्रजाओं का
समय समय पर तत् तत् ईच्छित फलों की पूर्तियों द्वारा सदा सर्वदा पोषण करती है ?