Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verses 30–31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verses 30–31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
कच्चित्परमकल्याण आत्मारामतया तव ।
प्रसादो जायते चित्ते शरदीव सरोम्भसि ॥ ३० ॥
कच्चित्करोषि समया सुप्रसन्नगभीरया ।
दृष्ट्या सुभग कार्याणि कार्याण्येव नराधिप ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे परमकल्याण, जैसे शरत्-काल में तालाब के जल में धूल आदि का आवरण न होने के कारण
उसमें प्रसन्नता (स्वच्छता) उत्पन्न होती है, वैसे ही क्या आपके चित्त में आत्मारामता के कारण
प्रसन्नता, रजोगुण ओर तमोगुण अनावरणरूपता उत्पन्न होती है ?