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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

अनर्थाकारकार्यासु नासीच्चेष्टासु खेदवान् । भूयोभूयः प्रयुक्तासु दिनमालास्विवेश्वरः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

पुनः पुनः दिवस मालाओं का निर्माण करनेवाले भगवान्‌ सूर्य की नाई वह राजा बार-बार धर्म, अर्थआदि की प्राप्ति की हेतुभूत क्रियाओं का अनुष्ठान करता था, दैवात्‌ उन क्रियात्मक चेष्टाओं से दुःख-पर्यवसित फलों के होने पर भी वह दुःखी नहीं होता था