Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 6, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 6, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
केचित्त्वकर्मणि रता विरता अपि कर्मणः ।
नरकान्नरकं यान्ति दुःखाद्दुःखं भयाद्भयम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
निषिद्धकर्म
में निरत ओर सत्कर्म से विरत कोई लोग नरक से नरक, दुःख से दुःख और भय से भय को प्राप्त होते
हैं । श्रुति भी है - विहितस्याऽननुष्ठानान्निन्दितस्य च सेवनात् । अनिग्रहाच्चेन्द्रियाणां नरः
पतनमृच्छति ॥ (विहित कर्मो को न करने से, गर्हित कर्मो के आचरण से ओर इन्द्रियों की स्वच्छन्दता
से मनुष्य का पतन होता है)