Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 6, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 6, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विचारवैराग्यवता चेतसा गुणशालिना ।
देवं पश्यत्यथात्मानमेकरूपमनामयम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार के गुणों से परिपूर्ण पुरुष को ही गुरुपूर्वक श्रवण आदि से साक्षात्कार प्राप्ति होती है,
ऐसा दिखलाते हैँ ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर विचार -वैराग्यवाले गुणशाली चित्त से आनन्दैकरस निर्विकार स्वयं -
प्रकाश आत्मा का वह साक्षात्कार करता है