Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
जगज्जालमयं नृत्तमिदं चित्तनटैस्ततम् ।
एतयैवैकया बुद्ध्या दृश्यते दीपलेखया ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्तरूपी नटों
द्वारा बनाया गया जगज्जालरूपी यह नाटक इसी एक साक्षी रूपी बुद्धि से, जो कि दीपक की शिखा की
नाईं है, देखा जाता है