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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

शेषस्तु चेतनो जीवः स चेच्चेत्येन चेतति । अन्येन बोध्यमानोऽसौ नात्मतत्त्ववपुर्भवेत् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

अब बाकी तो प्रमाता जीव है, वह विषयों के साथ जब प्रकाशता है, तब “मेँ इसे जानता हूँ यों त्रिपुटी-साक्षात्कार से बोधित होनेवाला यह प्रमाता आत्माका तात्त्विक स्वरूप कैसे हो सकता है ?