Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
तमसौ पूजयामास पप्रच्छ च महामुनिम् ।
संदेहदुर्द्रुमस्तम्भपरशुं सर्वकोविदम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
इस राजा ने सम्पूर्ण शास्त्रों के विज्ञाता,
सन्देहरूपी दुष्ट वृक्ष-स्तम्भ के छेदन में कुठारस्वरूप उन महामुनि माण्डव्य का पूजन किया और
पूछा