Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
हा कष्टमेव निग्राह्यो नित्यानुग्राह्य एष मे ।
दिष्ट्याद्य सुखवानस्मि कष्टमद्यास्मि दुःखवान् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
वध ओर बन्धन आदि से यह मेरा दण्डनीय है,
यह पुरस्कार आदि से सदा अनुकम्पनीय है, भाग्यवश आज सुखी हूँ तो दुर्भाग्यवश आज दुःखी हूँ, यह
सब परिशेष मेँ कष्ट ही है, हा कष्ट !