Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
स्वतो यदन्तरात्मेक्षोश्चित्त्वान्माधुर्यवेदनम् ।
तदहंतादि भेदादि जगत्तत्त्वादि जृम्भितम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मारूपी ईख के अन्दर
चित् होने से जो स्वतः माधुर्यवेदन है, वह तत् तत् आकारो से अभिव्यक्त अहन्ता, त्वन्ता आदिरूप
और घट, दीवार भेद आदिरूप जगत् हैं