Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verses 5–6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verses 5–6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 5,6
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
भगवन्भूतभव्येश कश्चिज्जातसमाधिकः ।
प्रबुद्ध इव विश्रान्तो व्यवहारपरोऽपि सन् ॥ ५ ॥
कश्चिदेकान्तमाश्रित्य समाधिनियतः स्थितः ।
तयोस्तु कतरः श्रेयानिति मे भगवन्वद ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवान्, हे भूत ओर भविष्यत् के ज्ञाता, कोई प्रबुद्ध पुरुष व्यवहार
करता हुआ भी समाधिस्थ के तुल्य विश्रान्त रहता है; कोई एकान्त मेँ आश्रय ले कर समाधि में स्थित
रहता हे । इन दोनों में से कौन श्रेष्ठ है, यह मुझसे कहने की कृपा कीजिये