Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
वटधाना वट इव यदन्तःस्थं सदात्मनः ।
तद्बहिर्भासते भास्वद्विकासे पुष्पगन्धवत् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
वट के फल के अन्दर वट बीजों के समान जो
सदा अपने अन्दर रहता है, वही दैदीप्यमान होकर विकास होने पर पुष्प की गन्ध के समान बाहर प्रकट
होता हे