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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

शान्तचित्तमहाभ्रस्य जनज्वालोज्ज्वलान्यपि । नगराण्यपि शून्यानि वनान्यवनिपात्मज ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राजपुत्र, जिसका चित्तरूपी महामेघ शान्त हो चुका यानी जो शरत्‌ के आकाश के तुल्य निर्मल है, उस पुरुष के लिए जनरूपी ज्वालाओं से उज्जवल नगर भी शून्य (निर्जन) वन ही हैं