Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verses 87–88
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verses 87–88 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 87
संस्कृत श्लोक
मेरुमन्दरकैलासहिमवद्विन्ध्यसानुषु ।
द्वीपोपवनदिक्कुञ्जजङ्गलारण्यभूमिषु ॥ ८७ ॥
ततःप्रभृति संप्राप्तपदमुद्दालको द्विजः ।
गुहासु गिरिकुक्षीणामवसद्ध्यानलीलया ॥ ८८ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरु, मन्दराचल, कैलास, हिमालय ओर विन्ध्याचल की चोटियों पर और द्वीप, उपवन,
दिशा, कुंज, जंगल और अरण्यभूमि इन सबमें यथेच्छ विहार करते रहे