Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 68
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
आनन्दे परिणामित्वादनानन्दपदं गतः ।
नानन्दे न निरानन्दे ततस्तत्संविदाबभौ ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस आनन्द में चित्त का रसास्वादलक्षण परिणाम न होने से वह उद्दालक “अनानन्द'
पद को प्राप्त हो गये, अतः उनका संविदात्मचैतन्य विषयी मनुष्यों की नाई न क्षुद्र आनन्द में रहा ओर
न दुःख में ही रहा, किन्तु स्वप्रकाशेकरसपूर्ण रहा