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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 54

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

विश्रम्याशु पपाताङ्ग संविदं विश्वरूपिणीम् । सेतुरुद्धं सरोवारि प्रतीपं स्वमिवास्पदम् ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, नहर द्वारा खेत में पहुँचाया गया सरोवर का जल खेत को भरकर पुल अर्थात्‌ बाँध से रुककर जिस प्रकार नहर द्वारा लौट कर उलट प्रवाह से फिर स्थान पर सरोवर में आ जाता है उसी प्रकार मन क्षणभर विश्रान्त होकर पुन: शीघ्र बाह्यप्रपंचाकार वृत्ति को प्राप्त हो गया