Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
व्योमसंविदि नष्टायां मूढं तस्याभवन्मनः ।
निद्रायां तु विलीनायां मैरेयमदवानिव ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार निद्रा-भंग हो
जाने पर शराबी विक्षिप्त-सा (पागल-सा) हो जाता है उसी प्रकार आकाश के पूर्वोक्त भ्रमात्मक ज्ञान
का नाश होने पर उस मुनि का मन मूढ अर्थात् मोहाक्रान्त हो गया