Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
निद्राव्यपगमे तस्य भावयामास तन्मनः ।
व्योमश्यामलदृग्जन्तुर्नभसीव शिखण्डकान् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश की ओर दृष्टि लगाये हुए
पुरुष को आकाश में बालों के गोले, मयुर आदि के पुच्छ की तरह चमचमाहट प्रतीत होती है उसी प्रकार
उनके मन ने निद्रा का नाश होने पर आकाश विविधरूपवाले है ऐसी भावना की