Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
तल्लुलाव स्थलाब्जानां वनं बाल इव द्विपः ।
अपिबच्चाप्यसृक्पूरं वेताल इव वेगतः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार हाथी का बच्चा स्थल
कमलो के वन को छिन्न-भिन्न कर देता है उसी प्रकार उन्होने उस भ्रम को नष्ट कर दिया ।
शंका : उन्होने उक्त भ्रम को सत्वगुण के विरोधी रजोगुण आदि से नष्ट कर दिया अथवा ओर
किसी से ?
समाधान : जिस प्रकार पिशाच बर्तन में भरे हुए रक्त को अत्यन्तवेग से क्षणभर में पी जाता है उसी
तरह वे तेज:पुंजात्मक भ्रम को शीघ्र पी गये अर्थात् अधिष्ठान तत्त्व का साक्षात्कार होने से उसका बाध
हो गया, रजोगुणादि द्वारा तेजःपुंज का नाश नहीं हुआ