Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
तमप्युन्मार्जयामास सम्यक्स्वान्तविवस्वता ।
सम्यग्ज्ञानोदितेनाशु पवनेनेव कज्जलम् ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
उन्होंने पवन से काजल के समान सत्त्वगुण के उद्रेक से उदित ज्ञानरूपी प्रकाशवाले
अन्तःकरणरूपी सूर्य से उस तमोगुणरूपी अन्धकार को भी शीघ्र अच्छी तरह नष्ट कर दिया