Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
रुरोध गुदसंकोच्चान्नवद्वारानिलानथ ।
मुखसंस्थगितः कुम्भो रन्ध्रकोशानिवेतरान् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद जिस प्रकार मुख मेँ कसकर बोधा हुआ जलपूर्णं
ओंधा (अधोमुख) बेडा अन्दर वायु के प्रवेश के बिना दूसरे छिद्रों से जल के न चूने से इतर रन्ध्र कोशों
को रोकता है, उसी प्रकार उन्होने मूलाधार के अवरोध से एडी द्वारा मलद्वार के संकोच से नवद्वार के
(नौ द्वारो से निकलनेवाले) वायुओं को रोक दिया