Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
संकल्पेन मनः पुष्ट्वा शरीरं बालयक्षवत् ।
आयुरेवाशनान्यस्मै स्वदुःखानि प्रयच्छति ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
*रागब्रेषवतो: ऐसा जो पहले कहा है, उसमें मन के देह में राग-द्वेष के अर्थो को दिखलाते है ।
जैसे बालक अपने संकल्प से यक्ष की कल्पना करता है वैसे ही मन अपने संकल्प से शरीर की
कल्पना कर इसके लिए आयु पर्यन्त भोजन की कल्पना कर पुष्ट बना कर अपने अभिनिवेश से होनेवाले
सब दुःखों को इसे देता है