Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
एतयोरेकसंस्थाने मृतिरित्येव या कथा ।
सा व्योम्न्यया स्त्रिया भुक्ता धरेति कथया समा ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि मरण से भोगायतन देह का नाश होने के कारण ही सब दुःखो का परिहार
क्यो न होगा 2 तो उस पर कहते हैं।
इन दोनों में से देह का विनाश होने पर भी एक के (मन के) रहने पर पुनः देहकल्पना अवश्य
होगी, अतः मरण की बात आकाश में जा रही स्त्री ने भूमि निगल डाली इस कथा के समान
असंभावित है (३३)