Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
विषयविषविषूचिकामनन्तां निपुणमहंस्थितिवासनामपास्य ।
अभिमतपरिहारमन्त्रयुक्त्या भव विभवो भगवान्भियामभूमिः ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
हे चित्त, सकल शास्त्रतत्त्वज्ञाताओं के
अभिमत द्वैत वासना परिहाररूप (अभिमत विषयत्यागरूप) मन्त्र युक्ति से असंख्य दुःखवाली
अहंकारवासनारूपी विषम विष तुल्य अज्ञान से पैदा हुई विषूचिका का भली-भाँति त्यागकर संसार
शून्य हो मरण आदि सब भयो के स्थान परिपूणनिन्दात्मा ही तुम होओ, यह अर्थ है