Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
बुद्धवत्सुदृढं बद्धपद्मासन उदङ्मुखः ।
पार्ष्णिभ्यां वृषणौ धृत्वा चकार ब्राह्ममञ्जलिम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रबुद्ध (ज्ञानी) कपिल आदि के समान दृढ़ सिद्धासन (४६) बाँधकर एड़ी से वृषणों को
(अण्डकोशों को) दबाकर उत्तर की ओर मुँह किये हुए उन्होंने ब्रह्मा आदि गुरु-परम्परा के लिए
प्रणामांजलि की