Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
स्वार्थमालोकने चक्षुर्यदितून्मुखतां गतम् ।
तदहं नाम कोसौ स्याद्योऽस्मिन्दुःखे न मोहितः ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
अब प्रत्येक इन्द्रिय के विषय से सम्बद्ध अह प्रतीति के भाजन का अन्वेषण करते हैं ।
यदि चक्षु अपने लिए आलोकन में प्रवृत्त हुआ, तो संसार में “अहम् नामक कौन है जो मोहित
हुआ ?