Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
कष्टं कोऽयमहं नाम कथं केनोपकल्पितः ।
जगद्बालकवेतालस्तालोत्तालातुलाकृतिः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़े खेद की बात है,
जगत्रूपी बालक का वेतालरूपी तथा ताड के पेड़ से भी लम्बी और अनूठी आकृतिवाला यह "अहम्"
कौन है ? किसने और कैसे इसकी कल्पना की है ?