Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
मांसमन्यदसृक्चान्यदस्थीन्यन्यानि चित्त हे ।
बोधोऽन्यः स्पन्दनं चान्यत्कोसावहमिति स्थितः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे चित्त, मांस अहं पदार्थ से पृथक् है, रक्त भी उससे अतिरिक्त है, हड्डियाँ भी 'अहम्” से भिन्न
हैं, बोध (ज्ञानेन्द्रियव्यापार) उससे अन्य है, स्पन्दन भी उससे अतिरिक्त है फिर "अहम्" रूप से स्थित
पदार्थ कौन है ? भाव यह कि मांस अदि तो आत्मा से भिन्नरूप से प्रतीत हो रहे हैं, अत: उनमें अहन्ता
उपपन्न नहीं हो सकती