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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

शरदभ्रवदागत्य शुद्धिं त्यक्तभवामयाम् । यदि शाम्यसि निर्मूलं तदनन्तो जयस्तव ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

तव प्रमाद से प्राप्त हुए इस बन्धन पर कैसे विजय प्राप्त हो सकती है ? ऐसा कोई पूछे, तो इस पर कहते हैं। पहले कर्म, उपासना आदि से शरत्कालीन मेघ के समान शुद्धि को जिसमें संसाररूपी दोष का सर्वथा त्याग हो चुका हो उसे प्राप्त होकर श्रवण, मनन आदि का परिपाक होने के कारण ज्ञानोदय से यदि वासनाजाल का सर्वथा उच्छेद कर शान्त होते हो, तो तुम्हारी असीम विजय है