Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
चाक्षुषीं वृत्तिमाश्रित्य प्रभारूपचयोन्मुखीम् ।
मा गच्छ दग्धतां मुग्ध कान्तिलुब्धपतङ्गवत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मूढ, तू कान्ता सम्बन्धी नाना प्रकार के रूपों में तत्पर चक्षुरिन्द्रियता के प्राप्त होकर प्रकाश में
लोलूप पतंगे के समान दाह को प्राप्त मत हो