Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
शब्दादिकाभिरेताभिः किं मूर्ख हतवृत्तिभिः ।
भ्रमस्यविरतं व्यर्थं मेघे मण्डूकिका यथा ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मूर्ख चित्त, मेढकी जैसे मेघ में शब्दादिक व्यर्थ वृत्तियों से भ्रमण करती हे वैसे ही तुम शब्द
आदि इन गर्हित वृत्तियों से क्यों निरन्तर भ्रमण करते हो ?