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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

आशाशतावपूर्णत्वे त्वमेवं सर्वदुःखदम् । त्यज्य याहि परं श्रेयः परमेकान्तसुन्दरम् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मन, तुम सैकड़ों भोग आशाओं से पूर्ण होने पर पूर्वोक्त रीति से सब दुःख देते हो । अब तुम भोगाशाओं का त्यागकर दुःखस्पर्शरहित निरतिशय आनन्दरूप होने के कारण अत्यन्त सुन्दर परम कल्याण को (निर्वाण को) प्राप्त होओ