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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अन्तः समसमाकारः सौम्यः सर्वार्थनिस्पृहः । कदोपशममेष्यामि मन्थमुक्तामृताब्धिवत् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे मंथन से उत्पन्न विक्षेप से मुक्त हुआ क्षीरसागर समाधिस्थ भगवान्‌ श्रीविष्णु से सुशोभित आकारवाला, प्रशान्त ओर मंथन से निकली हुई अमृत, कौस्तुभ आदि वस्तुओं में निस्पृह हो शान्ति को प्राप्त होता है वैसे ही परमात्मा से एकरस आकारवाला सौम्य, धर्म, अर्थ तथा कामरूप त्रिवर्ग में स्पृहारहित हो मैं कब अन्तःकरण में शान्ति को प्राप्त हूँगा ?