Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
कदा विकल्पजालं मे न लगिष्यति चेतसि ।
स्थितमप्युज्झितासङ्गं पयः पद्मदले यथा ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कमल के पत्ते में स्थित जल भी स्पर्श न होने के कारण कमल
के पत्ते मे नहीं लगता वैसे ही केवल आभास से मेरे चित्त में स्थित होते हुए भी उपेक्षा करने के कारण
सम्बन्धरहित विविध विकल्प मेरे चित्त में कब न लगेंगे ?