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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

ततः क्रमेण तपसा शास्त्रार्थनियमैः क्रमैः । विवेक आजगामैनं नवर्तुरिव भूतलम् ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर क्रमशः तपस्या से शास्त्रार्थ के नियमों के अभ्यास परिपाक से क्रमों से उन्हें विवेक प्राप्त हुआ जैसे कि भूतल को वसन्त ऋतु प्राप्त होती है